खाँसी से छुटकारा कैसे पाएँ (Khasi ki Dawa )


खांसी बहुत से कारणों से हो सकती है। जब लम्बे समय से खांसी आपको हो रही हो तो जल्द आपको Doctor से सलाह लेनी चाहिए क्यूँकि खाँसी आपके शरीर को बहुत नुकसान पहुँचा सकती है। दोस्तों आज के इस Article में हम खाँसी के बारे में बात करेंगे , खांसी क्या है और इससे कैसे बच सकते है।

Khasi ki dawa

सामान्यतः खांसी  बदलते मौसम,एलर्जी, ठण्डे पेय पदार्थो के सेवन, या किसी बड़ी बीमारी के शुरुआती लक्षण हो सकते है |आमतौर पर यदि खांसी एक सप्ताह तक होती है तो घबराने की कोई बात नहीं है, यह कभी कभी अपने आप या कुछ घरेलु नुस्खे के प्रयोग से भी ठीक हो जाती है |लेकिन जब हमारी खांसी दो हफ्तों से ज्यादा समय तक रहती है तब यह जानलेवा हो सकती है |ऐसे मे हमें डॉक्टर  से सम्पर्क करना चाहिए |

आइये सबसे पहले हम यह जानते है कि खांसी किन -किन कारणों से हो सकती है तथा इनसे बचने के  उपाय तथा क्या -क्या सावधानियाँ है |

खांसी होने के कारण :-

खांसी हमें होने के कई कारण हो सकते है |जो निम्न है –

1 . ऐलर्जी :-

                                सामान्यतः खांसी कभी -कभी हमें धूल, धुआँ, प्रदुषण, कोई सुगंध के एलर्जी से हो जाती हैं |ऐसे मे हमें जिन चीजों से एलर्जी होती है उस से दूर रहना चाहिए |ऐसे मे डॉक्टर से मिलकर कुछ Medecine के प्रयोग से ठीक हो जाता है |

2. मौसमी फ़्लू :-

                       यह सामान्य खांसी होती है जो लगभग एक सप्ताह तक रहती है |जो आमतौर पर मौसम मे आये अचानक बदलाव की वजह से होता है |आमतौर पर ठण्डे पेय पदार्थो (जैसे -कोल्ड्रिंक्स, आइसक्रीम, फ्रीज़ का पानी )के सेवन से भी हो जाता है |मौसमी फ़्लू मे नाक बंद, श्वास लेने मे तकलीफ, गले मे खरास, सिर मे भारीपन,बुखार इत्यादि लक्षण होते है |जो सामान्यतः अपने आप या घरेलु नुस्खे के प्रयोग द्वारा भी ठीक हो जाते है |

3.अस्थमा (दम्मा ):-

                               जब हमारी श्वासनलिका मे सूजन हो जाती है तो हमें श्वास लेने मे तकलीफ होती है, जिसे अस्थमा कहते है |अस्थमा मे श्वास (o2)आसानी से हमारे फेफड़े में नहीं जा पाते है क्यूँकि श्वासनलिका पतली हो जाती है |जिससे हमारे फेफड़े और श्वासनलिका पर दबाव पड़ता है |जिससे हमें खांसी आती है |सामान्यतः ठण्डे के मौसम मे हमारी मांसपेशीय सिकुड़ जाती है |इसमे खांसी के साथ बलग़म भी निकलता है |इन्हे इन्हेलर लेने की सलाह दी जाती है, क्यूँकि इन्हे श्वास लेने मे तकलीफ होती है |

4.   क्रोनिक ब्रोंकाइटिस (cronic bronkaitis ):-

                                                               जब हमारी श्वासनलिका मे संक्रमण हो जाता है, तब हमें इस प्रकार की खांसी होती है |यह किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क मे आने से, अत्यधिक भीड़ वाले इलाके मे रहने वाले लोगों को हो जाती है |

5. गैस्ट्रोएसोफाजाल रिफ्लक्स डिजीज (gastroesophageal reflux disease;GERD):-

                                                       जब कभी हमारे पेट मे अत्यधिक मात्रा मे अम्ल बनने लगती है तो वह श्वासनलिका मे ऊपर चढ़ने लगती है| जिसकी वजह से हमें खांसी होने लगती है, क्योकि हमारी श्वासनलिका अम्ल को सहन नहीं कर पाती है |

6.न्यूमोनिया (nyumoniya ):-

                                           न्यूमोनिया स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया नामक बैक्टीरिया के कारण होता है |इसमें हमारी फेफड़े मे Green Color का बलग़म जमा हो जाता है |जिससे श्वास लेने में काफी तकलीफ होती है और खांसी होने लगती है |

7.टीवी (tuber क्लोसिस ):-

जब खांसी दो हफ्तों से ज्यादा दिन रहे तो यह TV टीवी (तपेदिक रोग )का संकेत हो सकता है |यह एक संक्रामक बीमारी है |संक्रमित व्यक्ति के संपर्क मे आने से, तौलिया, कंघी, रेज़र, इत्यादि के इस्तेमाल से भी यह बीमारी दूसरे व्यक्ति को हो सकती है |इस खांसी मे बलग़म के साथ कभी कभी खून भी आता है |जब हमारा इम्युनिटी सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता )कमजोर पड़ जाता है तो यह बीमारी हमें अपने चपेट मे ले लेती है |

                                           भूख न लगना, लगातार वजन कम होना, लगातार खांसी आना, सर्दी मे भी पसीना आना, श्वास लेते हुए सीने मे दर्द होना इत्यादि इसके मुख्य लक्षण है |यह बहुत तेजी से हमारे अंग को प्रभावित करता है |यदि इसके जीवाणु हमारे हड्डी मे हो तो हड्डी को गला देता है, यदि यूट्रस मे हो तो  Ladies बाँझ हो सकती है, यदि इसके जीवाणु हमारे मस्तिष्क मे हो तो Brain Hamirez होने का खतरा होता है |

8.    क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD):-

                                      अत्यधिक धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को यह डिजीज अपने चपेट मे ले लेता है |इसमें फेफड़ो मे लगातार धुआँ जाने के कारण यह बीमारी होती है |इसमें खांसी सुबह सुबह अधिक होता है |इसमें लगातार खांसी आने के साथ बलग़म भी निकलता है |

9.  फेफड़ों का कैंसर :-

                            फेफड़ों का Cancer हो जाने की स्थिति मे भी खांसी आती है |इसमें फेफड़ों के ऊतक मृत हो जाते है |अंदर घाव बन जाता है, जिससे खांसने पर खून आता है |सीने मे जलन, दर्द, श्वास लेने मे तकलीफ जैसी समस्याएं होती है|

खांसी के प्रकार :-

आयुर्वेद के अनुसार खांसी पांच प्रकार की होती है :-

  1. वातज खांसी
  2. पित्तज खांसी :-
  3. कफज खांसी :-
  4. क्षतज खांसी :-
  5. क्षयज खांसी :-

1.वातज खांसी :-

                    वात (वायु ) के कारण होने वाली खांसी को वातज खांसी कहते है |इसे कुकुर खांसी या काली खांसी भी कहते है |इसमें कफ सुख जाता है और खांसी आती रहती है |इसमें व्यक्ति को खांसने के क्रम मे उल्टी भी हो जाती है, आँखे लाल हो जाती है, लगातार खांसने की वजह से व्यक्ति थक जाता है |इसमें व्यक्ति को ऐसा लगता है कि उसके गले मे कुछ फंस गया है पर खांसने के क्रम मे कुछ भी नहीं निकलता है और आदमी बेचैन हो जाता है |लगातार खांसने की वजह से सीने, गले,पेट, और सिर मे दर्द होने लगता है |

2.  पित्तज खांसी :-

                                 पित के कारण होने वाली खांसी को पित्तज खांसी कहते है |इसमें खांसने पर पीले रंग का बलग़म निकलता है |इसमें व्यक्ति का मुँह सुख जाता है, स्वाद का कड़वा लगना, प्यास लगा रहना, गर्माहट बना रहता है |खांसी के साथ बलग़म निकलने पर मरीज राहत महसूस करता है |

3.   कफज खांसी :-

                           कफ के कारण होने वाले खांसी को कफज खांसी कहते है |इसमें काफी मात्रा मे पीला कफ निकलता है |बार बार नाक, मुँह मे कफ भर जाता है |इसमें आलस्य, सिर भारी, स्वाद न लगना जैसी समस्या होती है |

4.  क्षतज   खांसी :-

                         यह खांसी वात, पित और कफ तीनो वजह से होती है |यह भयंकर खांसी होती होती है तथा वात, पित, और कफ वाली खांसी से हानिकारक होती है |यह अत्यधिक  उन लोगो को होती है जो अत्यधिक भोग -बिलास, अत्यधिक बोझ वाला काम करने वाले लोगो, लड़ाई -झगड़ा करने वाले लोगो को होती है |इसमें गले मे घाव हो जाता है जिससे खांसी होने पर बलग़म के साथ मवाद और खून भी आता है |

5.   क्षयज खांसी :-

                                यह सभी खांसियों से भयंकर होता है |इसमें खांसी के साथ बलग़म और खून आता है |यह टीवी का शुरुआती लक्षण है |इसे इग्नोर करने पर हमारी जान भी जा सकती है |इसमें कमजोरी, शरीर मे दर्द, बुखार हो जाता है |गलत खान -पान, अत्यधिक भोग बिलास, घृणा -शोक के कारण यह बीमारी होती है |

खांसी की आयुर्वेदिक दवाई :-

                                     हमारे आस पास तथा हमारे किचन मे ही खांसी के ठीक होने की दवाएं है जिसका उपयोग कर हम स्वस्थ हो सकते है |

1.हल्दी :-

हल्दी मे एन्टीबैट्रियल गुण होता है |इसका उपयोग हम खांसी मे कर सकते है |इसकी तासीर गरम होती है |

I . 250g पानी गैस पर उबलने के लिए रख दे|फिर इसमें बारीक़  कटा हुआ कच्चा हल्दी, 4-5तुलसी पता, 4-5काली मिर्च कूटकर डाल दे तथा इसे तब तक उबाले रहेंगे जब तक पानी जलकर एक कप के बराबर न हो जाय |इसका सेवन सुबह -शाम करें |

II. एक गिलास पानी मे 1चमच्च हल्दी डालकर उबाल ले|फिर उसे ढ़ककर रख दे जब हल्दी पक जाय तब चाय की तरह पी लें |

III . सोते समय गरम दूध मे हल्दी, ghee, गुड़ डालकर पिये |

2.   शहद :-

शहद गर्म होता है तथा खांसी मे बहुत असरदार होता है |शहद मे एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुण होते है |इसमें सभी प्रकार के विटामिन, ग्लूकोज, फलशर्करा, तथा खनिज लवण पाए जाते है |

  •  ताजा निम्बू के रस मे शहद का एक बड़ा चमच्च डालकर मिश्रण तैयार करें तथा नियमित अंतराल पर इस घोल को पिये |
  •  गरम पानी मे शहद,निम्बू का रस और नमक डाल कर गरारा करें |
  • केले की दो सुखी पती को लेकर पानी से धो ले तथा धूप मे सुखाले |फिर उसे आग मे जला दे अब उसकी राख़ को इकट्ठा कर ले |राख़ को किसी सूती या मलमल के कपडे से छान ले |करीब 25g राख़ मे 250g शहद डालकर अच्छे से मिला ले और एक एक चम्मच सुबह -शाम सेवन करें |

3. अदरक :-

अदरक मे विटामिन के साथ साथ मैग्निज  और copper भी पाए जाते है |अदरक मे एंटीवायरल, एन्टिटॉक्सीक  और एंटीफंगल गुण होते है |यह प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है तथा शरीर को शक्तिशाली बनाता है |

  •   एक इंच अदरक के टुकड़े को पीस ले |फिर उसे किसी कटोरी मे रखकर तब तक उबाले जब तक उसका  पानी सुख न जाय |फिर उसे गैस से उत्तार ले और थोड़ा ठंडा होने पर उतना ही मात्रा मे शहद मिला ले |इसे हल्का गरम ही सेवन करें |सुबह दोपहर शाम को खाये 2-4दिनों मे ही आपकी खांसी जड़ से खत्म हो जाएंगी |
  •   एक गिलास पानी को पतीले मे डालकर गैस पर चढ़ा दे|फिर उसमे 2इंच अदरक के टुकड़े को बारीक काटकर, 5-7तुलसी पत्ता डालकर उबाल ले|10 मिनट उबालने के बाद उसे छान ले|स्वादानुसार उसमे निम्बू तथा गुड़ डालकर गरम -गरम सेवन करें |

4.  काली  मिर्च :-

                       काली मिर्च मे रोगाणु रोधी गुण पाए जाते है |यह कफ को कम करने तथा भरी हुई नाक को साफ करने मे मदद करता है |

  • 8-10काली मिर्च को बारीक कूट ले |फिर उसे एक कटोरी मे रखे तथा उसमे गाय का शुद्ध घी डालकर धीमी आंच पर गरम करे |जब काली मिर्च पक जाए  तो उसे आग से उत्तार ले और उसमे 4-5तुलसी पता डालकर गरम -गरम सेवन करे |सुबह -शाम इसका सेवन करे |
  • प्रतिदिन दिन मे दो से तीन बार गरम पानी मे आधा चमच्च काली मिर्च पाउडर डालकर पिये |
  • गरम पानी मे काली मिर्च पाउडर और नीलगिरि के तेल को डालकर भाप ले |यह बलगम निकालने मे बहुत फायदेमंद होता है |
  • कालीमिर्च  और तिल के तेल का मिश्रण बना कर इसे  सूंघे| सर्दी –खांसी मे बहुत राहत मिलती है |

5 .   तुलसी पता :-

                          तुलसी पता मे रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है | यह सर्दी, खांसी, जुकाम मे बहुत फायदेमंद होता है |तुलसी मे एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल व एंटीबायोटिक गुण होते है जो हमें संक्रमण से बचाते है |

  • एक गिलास पानी मे 5-7तुलसी पता, स्वादानुसार नमक, 4-5 कालीमिर्च डालकर तबतक उबाले जबतक पानी आधा न हो जाए |इसे चाय की तरह serve करे |प्रतिदिन सुबह -शाम इसके सेवन से सर्दी -खांसी मे हमें आराम मिलता है |
  • 500g पानी मे 8-10 कालीमिर्च, 2लौंग कूटकर, 1चमच्च अजवायन, सौंठ पाउडर 1चमच्च, 8-10तुलसी पता, 1चमच्च कच्चा हल्दी, गुड़ स्वादानुसार, 2छोटी इलायची डालकर उबाल ले |जब पानी आधा हो जाए तब गैस को बंद कर दे |यह दवा वयस्क को 2-2चमच्च दिन मे दो बार तथा बच्चे 1-1चमच्च ले l|

6.  निम्बू :-

निम्बू मे विटामिन -सी पाया जाता है |इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होता है |यह हमारे शरीर मे संक्रमण पैदा करने वाले कीटाणुओं से बचाता है |

  • गरम पानी मे शहद और निम्बू का रस मिलाकर पीने से खांसी जुकाम मे राहत मिलती है |
  • निम्बू को बीच से दो भागों मे काट ले |फिर उसे गैस पर धीमे आंच पर सीधा रख ले | अब निम्बू के ऊपर , कुटा हुआ काली मिर्च और नमक डाल दे|जब निम्बू उबलने लगे तब गैस बंद कर दे |हल्का गर्म ही इसे चूसे |खांसी मे बहुत लाभदायक होता है |

7.   अमरुद के पते :

अमरुद के कोमल पतों को चबाने से भी खांसी नहीं आती है |

8.   गिलोय :-

गिलोय खांसी के लिए रामबाण है | गिलोय मे एंटीबैक्टीरियल गुण होते है, जो खांसी मे अत्यंत लाभकारी होते है |

9.   प्याज :-

               प्याज़ मे कैल्सियम, मैग्निसियम, सोडियम, पोटैसियम, फास्फोरस  जैसे खनिज पाए जाते है |

  • प्याज़ का रस और शहद बराबर मात्रा मे मिलाकर खाने से खांसी और ख़राब गला ठीक हो जाता है |
  • प्याज़ को काट ले तथा उसे गाय के घी मे पकाकर खाये |
  • प्याज को आग मे पकाकर सुबह -शाम खाने से खांसी दूर होती है |

दादी -माँ के नुस्खे :-

  •  सर्दी –खांसी होने पर सोते समय अपने दोनों हथेलियों तथा पैरो के तलवे मे सरसों के तेल की मालिश करके सोये |
  • गरम पानी मे नमक डालकर सुबह शाम गरारा करे तथा दो -तीन घूंट पानी भी पी ले l|
  • लौंग को तवा पर भून ले तथा हमेशा एक लौंग जबड़ा मे दबा कर रखे, खांसी नहीं आएगी|
  • 5-6तुलसी पता को अढ़ाई कालीमिर्च के साथ खाली पेट मे चबा चबाकर खाये |
  • रात को सोते समय दूध मे हल्दी, गुड़, गाय का घी डालकर गरम -गरम पिये |
  • छुहारे को आग मे पकाकर खाये |
  • जेठी मध चूसने से भी खांसी मे आराम मिलता है |
  • अजवायन सत के टुकड़े को मुँह मे रखे खांसी नहीं आएगी |
  • 5-6छुहारे के दाने को करीब एक गिलास दूध मे उबाले | जब दूध एक कप बच जाए तो उसे आंच से उतार ले और गरम गरम ही पिये तथा छुहारे को खा ले |
  • दिव्य पेय का सेवन चाय के स्थान पर करे |इसमें अश्वगंधा व  कालीमिर्च होता है जो खांसी को कम करता है |
  • लवंगयादिवटी तथा मरीच्यादिवटी की एक एक गोली को चूसते रहे, खांसी नहीं आएगी |
  • मधुवानी को सुबह दोपहर शाम को खाना खाने के बाद 1/2चमच्च सेवन करे |इसके बाद पानी न पिये |
  • सितोपलादि चूर्ण को शहद के साथ ले सकते है |
  • 100ml पानी मे 10g मुलहठी चूर्ण को उबाले, जब पानी आधा रह जाए तो ठंडा करके सोते समय पिये |
  • 1/2cup पानी मे 1इंच अदरख का टुकड़ा, दो लौंग को कूटकर उबाल ले |फिर उसमे 4-5 तुलसी पता, ¼ चमच्च चाय, स्वादानुसार चीनी, एक गिलास दूध डाल दे | जब दूध उबल जाए तो आंच धीमी कर 4-5मिनट उबाले, फिर चाय की तरह सेवन कर |

सर्दी खांसी होने पर कुछ सावधानियां :-

  • फ्रीज़ का ठंडा सामान न खाये |
  • ठण्ड से बचें |
  • तैलीय पदार्थो से दूर रहे |
  •  गरम पानी पिये |
  • दही, आइसक्रीम, कोल्ड्रिंक्स न ले |
  • चावल न खाये |
  • खाना हमेशा गर्म खाये ||
  • हमेशा करवट लेटे, चित सोने से ज्यादा खांसी आती है |
  • गरम कपडे पहने, खास कर अपने गले और सिर को ढक कर रखे |

                         हम उपर्युक्त बातों को ध्यान मे रखने से खांसी से बचें रहेंगे | खांसी का तुरंत इलाज़ कराये नहीं तो यह लाइलाज बीमारी बन जाएगी | हमेशा संयम और परहेज मे रहे |

Leave a Reply